You are currently viewing चाइल्ड हेल्थ टिप्स इन हिंदी  |  child health tips in hindi
child health

चाइल्ड हेल्थ टिप्स इन हिंदी | child health tips in hindi

चाइल्ड हेल्थ टिप्स इन हिंदी | child health tips in hindi -जच्चा और बच्चे के स्वास्थ्य और बेहतर देखभाल के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है |बच्चों का स्वास्थ्य पुरे राष्ट्र के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सूचक होता है | साथ ही यह देश के भविष्य के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि ये बच्चे ही आगे जाकर भविष्य में वयस्क बनेंगे।

चाइल्ड हेल्थ टिप्स इन हिंदी  |  child health tips in hindi

बच्चों का दीर्घकालिक स्वास्थ्य और विकास , जीवन की प्रारंभिक घटनाओं से काफी ज़्यादा प्रभावित हो सकता हैं, जो कि उनकी माँ के स्वास्थ्य के साथ उनके जन्म लेने से पहले ही शुरू हो जाता हैं। इसलिए यह सवाल पूछना सही है कि बच्चों के स्वस्थ होने का क्या मतलब है? क्या दुनिया पूरी तरह से बच्चों के स्वास्थ्य का अनुमान और उस पर निगरानी कर रही है? हम इन सवालों के जवाब देने की कोशिश करेंगे, लेकिन सबसे पहले हम यह समझेंगे कि चाइल्ड हेल्थ केयर(child health care) इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

चाइल्ड हेल्थ टिप्स इन हिंदी | child health tips in hindi

बच्चों को केवल बीमारी से बचाना ही नहीं है बल्कि उनके शरीर, मन, बुद्धि , सामाजिक और भावनात्म्क पहलु के अच्छे होने की स्थिति है । स्वस्थ बच्चे उन परिवारों और समुदायों में रहते हैं जो उन्हें अपनी पूरी विकास क्षमता तक पहुंचने में सहायता प्रदान करते हैं। बचपन के दौरान का स्वास्थ्य, वयस्क स्वास्थ्य के लिए आधार तैयार करता है। इस दुनिया में हर एक बच्चे का स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है | शहरी क्षेत्र या ग्रामीण क्षेत्र, विकसित देश या अविकसित देश, अमीर परिवार या गरीब परिवार से संबंधित बच्चो के स्वास्थ्य में बहुत ज़्यादा असमानता पाई जाती है।

उदाहरण के लिए – “सब सहारा अफ्रीका” में आर्थिक असमानताएं शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मौजूद हैं, लेकिन बच्चो के स्वास्थ्य में असमानता की समस्या शहरी क्षेत्रों में काफी ज़्यादा हैं। बाल कुपोषण में शहर के अंदर का अंतर पुरे शहरी-ग्रामीण अंतर की तुलना में ज़्यादा है। यहा तक की माँ की देखभाल में भी बहुत बड़ी गरीब-अमीर असमानताएँ हैं। नर्सों और दाई द्वारा दी जाने वाली देखभाल ज्यादातर देशों में अमीर वर्ग तक ही सीमित दिखती है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गरीब-अमीर असमानताएं बड़े स्तर पर विद्यमान हैं | बिना किसी संस्थागत देखभाल के ज़्यादातर जन्म ग्रामीण गरीब परिवारों में होते हैं जहां बच्चे और माँ, दोनों के स्वास्थ्य का गंभीर ख़तरा बना रहता हैं। बच्चों में ये कुछ सामान्य संक्रमण होने का खतरा हमेशा बना रहता हैं यथा -कान का दर्द, यूरिनरी ट्रेक्टर इन्फेक्शन, त्वचा रोग, दर्द, सामान्य सर्दी, बैक्टीरियल साइनसाइटिस, खांसी आदि।

चाइल्ड हेल्थ टिप्स इन हिंदी | child health tips in hindi

समय के साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं ज़्यादा बच्चों के लिए उपलब्ध हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप शिशु मृत्यु दर में काफ़ी गिरावट आई है।यद्यपि अभी भी भारत जैसे विकासशील एवं गैर-विकासशील देशों में बाल -स्वास्थ्य की समस्या गंभीर चुनौती बनी हुई है | बाल-मृत्यु दर एवं मातृत्व-मृत्यु दर की भयावह स्थिति समाज एवं सरकार दोनों के लिए महत्पूर्ण चुनौती है | बाल स्वास्थ्य के सम्बन्ध में जागरूकता एवं व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास बच्चो के जीवन रक्षा में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है | बच्चे के स्वास्थ्य की देखभाल करने के यह कुछ तरीके अत्यंत महत्वपूर्ण है |

बचपन की देखभाल : बच्चो की सेहत की निरंतर रूप से देखभाल होनी चाहिए | जन्म से लेकर कुछ वर्षो तक बच्चो के स्वास्थ्य की निरंतर देखभाल की आवश्यकता होती है | थोड़ी सी असावधानी उनके लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है | बच्चों के विकास की सुरक्षा और उनके सेहत की देखभाल उनके सम्पूर्ण विकास का आधार है ।


बच्चो के साथ समय बिताए : चाहें आप दुनिया का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य क्यों न कर रहे है , बचपन का एक समय निर्धारित जो बीत जाने के पश्चात नहीं आने वाला | बचपन और इस समय का सम्मान करे | बच्चों के साथ समय बिताये |


नियमित टीकाकरण : बच्चो का नियमित टीकाकरण उन्हें गंभीर रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है साथ ही उनके शरीर में आवश्यक रोग -प्रतिरोधक क्षमता के विकास में मदद करता है |


स्तनपान और बच्चे का विकास : 6 महीने की उम्र तक बच्चे को विशेष रूप से स्तनपान कराना चाहिए | दो साल या उससे अधिक उम्र वाले बच्चो के लिए खाद्य पदार्थों के साथ-साथ स्तनपान जारी रखा जाना चाहिए।


एचआईवी और शिशु आहार : डब्लूएचओ स्तनपान को बढ़ावा देने और समर्थन करने की सलाह देता हैं और एचआईवी-की मौजूदगी में, एचआईवी-मुक्त शिशुओं और बच्चों के लिए आजीवन एंटीरेट्रोवायरल उपचार के नियम का कानून बनाता हैं।


दो बच्चो के मध्य अंतर रखें -प्रत्येक बच्चे के शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक विकास हेतु कुछ वर्ष अपेक्षित है | दो बच्चो के मध्य अंतर नहीं होने से उनका यह विकास प्रभावित हो सकता है | साथ ही माँ के बेहतर स्वास्थ्य हेतु भी यह अनिवार्य है |


बेहतर परवरिश करें -बाल मन के अचेतन मन पर जो लकीरें खींच जाती है वहीं आगे मनुष्य के व्यक्तित्व का हिस्सा हो जाता है | समाजशास्त्रीय शोध यह प्रमाणित करता है कि मनुष्य का अच्छा , बुरा , साहसी ,डर युक्त , नैतिक , अनैतिक , मिलनसार , ईष्यालु , स्वकेन्द्रित इत्यादि होना उसके बचपन , वातावरण एवं परवरिश से जुड़ा होता है | बेहतर परवरिश कर उसे अच्छा मनुष्य एवं अच्छा नागरिक बनाकर बेहतर समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है |

बाल स्वास्थ्य में सुधार के लिए ये कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं –
1) इंटीग्रेटेड मॅनॅज्मेंट ऑफ़ चाइल्डहुड इलनेस (IMCI) : IMCI बाल स्वास्थ्य के लिए एक संगठित दृष्टिकोण है जो पूरे बच्चे की भलाई पर ध्यान देता है।
2) ग्लोबल एक्शन प्लान फॉर निमोनिया और डायरिया (GAPPD) : इसमें विश्व स्तर पर सभी बच्चों की 29% मृत्यु का ज़िम्मेदार, “निमोनिया और डायरिया”, से होने वाली मौतों को समाप्त करने के लिए एक संयुक्त दृष्टिकोण है।
3) एनसीडी की रोकथाम : इसका मकसद बाद के जीवन में बचपन के गैर-संचारी रोगों के जोखिम के कारण को समाप्त करना है।
4) बाल स्वास्थ्य और पर्यावरण : स्वच्छ हवा, सुरक्षित वातावरण और शारीरिक गतिविधि बच्चों के जीवित रहने और पनपने के लिए आवश्यक शर्तें हैं।

निष्कर्ष

हाल के वर्षों में, उन विषय पर ध्यान दिया गया है जो बच्चों को प्रभावित करते हैं और उनके स्वास्थ्य में सुधार लाते हैं। अब बच्चे की पहचान जो वो आज है बस उससे नहीं, बल्कि भविष्य मे जब वों परिवार बनाएँगे, कार्यबल को शक्ति देंगे और अन्य काम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, उनसे उनकी पहचान होने लगी हैं।

इस बात का सबूत यह है कि बचपन के दौरान स्वास्थ्य, वयस्क स्वास्थ्य के लिए मंच तैयार करता है। यह सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण नैतिक, सामाजिक और आर्थिक अनिवार्यता भी बनाता है कि सभी बच्चे उतने ही स्वस्थ हैं जितना वे हो सकते हैं क्योंकि स्वस्थ बच्चों के स्वस्थ वयस्क बनने की संभावना अधिक होती है।

courtesy: google images

Leave a Reply