दुःख क्यों हैं ?

दु:ख के सत्य की स्वीकृति से ही आध्यात्मिक प्रक्रिया का प्रारंभ माना जाता है | यद्यपि उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि दु:ख का कारण क्या है | सबसे महत्वपूर्ण

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दुःख है |

भगवान बुद्ध की सर्वाधिक महत्वपूर्ण शिक्षा चार आर्य सत्य है | इन्हे केवल सत्य नहीं बल्कि आर्य सत्य कहा जाता है | इन्हे दो महत्वपूर्ण कारणों से आर्य सत्य कहा

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समता

समता का अर्थ प्रत्येक परिस्थिति में समान भाव या समभाव की अवस्था है | चाहे सामान्य जीवन हो या आध्यात्मिक जीवन- दोनों में ही समता भाव का विशेष महत्व है

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जागरूकता

दुनिया के सभी धर्मो एवं आध्यात्मिक पद्धतियों के अध्ययन के पश्चात् जो एक चीज सबसे महत्वपूर्ण रूप में सामने आती है वह है -जागरूकता | जागरूकता ही होश की अवस्था

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ब्रह्मचर्य

ब्रह्मचर्य संस्कृत के दो शब्दो – ब्रह्म और चर्य के मेल से बना है | ब्रह्म का अर्थ ईश्वर और चर्य का अर्थ आचरण से है | इस प्रकार ब्रह्मचर्य

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अपरिग्रह

अपरिग्रह संस्कृत के शब्द परिग्रह का विपरीत है | परिग्रह शब्द का अर्थ भौतिक संपदा का संचय करना, भौतिक संपदा को जमा करना और उसके प्रति लालच करना है |

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अस्तेय क्या है ?

अस्तेय शब्द संस्कृत के शब्द ‘स्तेय ‘ के विपरीत अर्थ वाला है | ‘स्तेय’ शब्द का अर्थ ‘चोरी करना’ है | ठीक इसके विपरीत “अस्तेय ” का अर्थ किसी भी

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