You are currently viewing सम्यक समाधि

सम्यक समाधि


भारतीय आध्यात्मिक प्रक्रिया में सम्यक समाधि अत्यंत विशिष्ट महत्त्व रखता है | सामान्य रूप में समाधि का तात्पर्य ध्यान की उच्चतम अवस्था से लगाया गया है | सम्यक समाधि को पाली भाषा में ‘सम्मा समाधि’ के रूप में जाना जाता है | बौद्ध धर्म के अष्टांगिक मार्ग में समाधि त्रि-रत्न के तहत सम्यक प्रयास , सम्यक संचेतना और सम्यक समाधि का महत्वपूर्ण स्थान है | समाधि शब्द मूल धातु ‘सम -अ -धा’ से मिलकर बना है जिसका अर्थ है ‘एक साथ लाना ‘ | समाधि का तात्पर्य मन अथवा चित को एक साथ लाना है | सामान्य भाषा में इसे ही ‘चित एकाग्रता’ भी कहा जाता है | मनुष्य जीवन की जो भी उपलब्धि है वह चित की एकाग्रता अथवा सम्यक समाधि से ही जुडी हुई है |

सम्यक समाधि में चित को विशेष बिंदु अथवा चीज़ पर केंद्रित करने का अभ्यास किया जाता है | चित के प्रकीर्णन के विपरीत चित की एकाग्रता चमत्कारिक रूप में परिणाम लाती है | सूर्य किरणों की असंख्य पुंजों से भी यदि वे प्रकीर्णित हैं तो अग्नि उत्पन्न नहीं हो सकती | इसके विपरीत सूर्य किरणों की कुछ पुंजों को यदि एकाग्रित कर किसी खास बिंदु पर फोकस किया जाये तो उसमे अग्नि उत्पन्न हो जाती है | लेंस के द्वारा किसी कागज के टुकड़े में अग्नि उत्पन्न होना इसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के फलतः होता है | अध्यात्म और यौगिक प्रक्रिया में सम्यक समाधि के अभ्यास से दुःखों से मुक्ति के साथ -साथ परम सत्य के अनुभव तक पहुंचा जा सकता है | हमारा मन विचारो के रूप में प्रकीर्णित होता रहता है जिससे कुछ भी प्राप्त नहीं होता | विचार भी ऊर्जा का ही स्वरुप है जो तरंगों के रूप में है | सम्यक माइंड -फुलनेस के तहत हम बादलों की तरह आती -जाती उन विचारों को तटस्थ भाव से देखते जाते है | यद्यपि मन को एक साथ किसी ऊर्जा के रूप में उपयोगी लाना हो तो सम्यक समाधि के अभ्यास से ही संभव हो पाता है |

चित एकाग्रता तो एक शिकारी भी अपना निशाना लगाते समय रखता है लेकिन यह सम्यक समाधि नहीं है | इसके अंतर्गत शुद्ध चित के साथ मन की एकाग्रता बनाये रखना होता है | सम्यक समाधि में मनुष्य के जीवन के रूपांतरण की क्षमता निहित है | सामान्य मनुष्य के जीवन के किसी भी क्षेत्र के कार्य की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है | अध्ययन अथवा विधार्थी के जीवन में इससे समझ की क्षमता में गहराई का समावेश तथा बुद्धि कुशाग्र हो जाती है | मनुष्य के आपसी सम्बन्धों में सुधार आता है तथा मनुष्य भावनात्मक बुद्धिमता को बेहतर आत्मसात कर पाता है | परिवार के अंदर की समस्याओं का निराकरण एवं पारस्परिक सम्बन्धो का निर्वहन बेहतर कर पाता है |

सम्यक समाधि के तहत मन या चित को एकल -बिंदु पर केंद्रित कर ध्यान की अवस्था है | इसके तहत चार ध्यान ( पाली भाषा में ‘झान’ ) की अवस्था आती है | प्रथम ध्यान की अवस्था के तहत साधक को सांसारिक चीज़ों के प्रति आसक्ति का त्याग के कारण सुख और आनंद का अनुभव होता है | ध्यान की द्वितीय अवस्था के तहत चित की एकाग्रता के फलतः सुख और आनंद का अनुभव होता है | ध्यान की तृतीया अवस्था में समता ( समभाव ) और सम्यक माइंड -फुलनेस का स्पष्ट प्रभाव होता जिसके फलतः आनंद का अनुभव होता है | ध्यान की चतुर्थ अवस्था में शुद्ध समभाव और सम्यक संचेतन की अनुभूति होती है जो परम ज्ञान के पथ में आधारभूत है |

courtesy : google images

Leave a Reply