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सम्यक आचरण

सम्यक आचरण , सही प्रकार से किया जाने वाला कर्म है | सम्यक आचरण संस्कृत में ‘सम्यक कर्मान्त’ एवं पाली भाषा में ‘सम्यक कम्मन्तो’ के रूप में उल्लेखित है | मनुष्य इस जीवन में अपने मन , वाणी और शरीर से जो भी कर्म करता है – वही उसका आचरण बनता है | मनुष्य का आचरण उसके जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण निर्धारक तत्त्व होता है | दुनिया की सभी शिक्षाओं में केवल कर्म नहीं बल्कि सही प्रकार से कर्म करने अर्थात सम्यक आचरण पर जोर दिया गया है | भगवान् बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति पश्चात मुक्ति के लिए जो अष्टांगिक मार्ग बताये उसमे सम्यक आचरण महत्वपूर्ण है |

मनुष्य का किया जाने वाला कर्म उसके नियति का निर्धारक है | सम्यक आचरण मनुष्य को अपने कर्म एवं किये जाने वाले आचरण को शुद्ध रखने की शिक्षा देता है | सम्यक आचरण मनुष्य के जीवन में शील के पालन का प्रमुख अंग है | जीवन में शील के पालन को सुनिश्चित करने के लिए सम्यक वाणी , सम्यक आजीविका के साथ- साथ सम्यक आचरण के नियम को अपनाना होता होता है | सम्यक आचरण के तहत मुख्य रूप से तीन तरह के बुरे कर्म से बचना चाहिए |

जीव -हत्या से बचना – मान्यता है की इस संसार में एक छोटे कीट से लेकर मनुष्य तक सभी का जीवन महत्वपूर्ण है | सभी जीवों की उत्पत्ति सृजन की एक विशेष प्रक्रिया के तहत हुई है | यह प्रक्रिया शाश्वत एवं सार्वत्रिक है – जिसका सभी को पालन करना होता है | जब मनुष्य किसी जीव की हत्या करता है, तो चाहे प्रत्यक्ष रूप में या अप्रत्यक्ष रूप वह उस शाश्वत नियम के विरुद्ध कार्य होता है | इस सृष्टि में सभी जीवन मूल्यवान है | अभी तक के विकसित विज्ञान में भी यह क्षमता नहीं है की वह पेड़ का एक पत्ता भी प्राकृतिक रूप में बना सके | यद्यपि कृत्रिम रूप में विज्ञान कुछ भी बना सकता है | जब मनुष्य किसी जीवन का सृजन नहीं कर सकता तो उसे कोई हक़ भी नहीं है कि वह किसी जीवन का विनाश करें |

चोरी कर्म से बचना — चोरी करना निषिद्ध कर्म है जिसके तहत किसी दूसरे का धन , वस्तु अथवा कोई भी चीज को धोखे से, झूठ , छल या कपट से प्राप्त किया जाता है | इसके तहत जो चीज अपनी नहीं है उसे किसी भी असम्यक या गलत तरीके से प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है | चोरी के कर्म से दूसरे मनुष्य को नुकसान होता है तथा अत्यंत पीड़ा पहुँचती है -जो गलत कर्म की श्रेणी में शामिल है | यह बुरा कर्म कालांतर में वैसा ही कर्म -फल लाता है | इस नियम का एक सूक्ष्म पहलु यह है की यदि हम किसी को छल द्वारा या झूठे वादे या झूठी बातों के आधार पर भी उसकी कोई चीज हड़प जाते है — तो यह भी पाप कर्म माना जाता है | अतः इस निषिद्ध कर्म से बचना आवश्यक है |

व्यभिचार से बचना –सम्यक आचरण के तहत अवैध या अनैतिक यौन संबंधो से बचना एवं जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन या अपने जीवन -साथी के प्रति वफादार रहना जरुरी है | अविवाहित मनुष्य को ब्रह्मचर्य का आचरण करना होता है | जबकि विवाहित पुरुष अथवा स्त्री को अपने जीवन -साथी के प्रति ईमानदार एवं वफादार होना होता है | किसी की अनिच्छा से उसके साथ यौन -सम्बन्ध , किसी नाबालिग के साथ यौन -सम्बन्ध , अनाथ के साथ यौन -सम्बन्ध , वह जो माता , पिता या पति के द्वारा संरक्षित है — इनके साथ यौन -सम्बन्ध निषिद्ध है | अपने जीवन साथी को धोखा देना भी व्यभिचार है |

courtesy : Google images

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