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संज्ञा किसे कहते हैं

संज्ञा किसे कहते हैं ?

हिन्दी व्याकरण में संज्ञा का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। यह जाने बिना कि संज्ञा किसे कहते हैं हिन्दी का ज्ञान पूरा नहीं हो सकता है। इस लेख में आप जानेंगे कि संज्ञा कितने प्रकार की होती है और उसका वर्गीकरण कैसे होता है। साथ-ही संज्ञा को कैसे पहचाने और उसके उदाहरण भी बताए गए हैं।

लेकिन सबसे पहले आइए जानते हैं कि संज्ञा किसे कहते हैं?

संज्ञा किसे कहते हैं?

संज्ञा’ (Sangya) उस शब्द को कहते हैं जिससे किसी विशेष वस्तु, स्थान, भाव, अथवा जीव के नाम का बोध होता है। यहाँ वस्तु शब्द संकीर्ण अर्थों में प्रयोग नहीं हुआ है, बल्कि वह व्यापकता लिए हुए है।

संज्ञा विकारी शब्द है क्योंकि संज्ञा के रूप लिंग, वचन और कारक के अनुसार बदलते हैं।

अँग्रेजी भाषा में किताब, मेज़, घर इत्यादि जैसी किसी निर्जीव संज्ञा का कोई लिंग नहीं होता है। किन्तु हिन्दी भाषा में सभी संज्ञा शब्दों का कोई-न-कोई लिंग (स्त्रीलिंग अथवा पुल्लिंग इत्यादि ) अवश्य होता है। अन्य भाषाओं से हिन्दी में आए हुए संज्ञा शब्द हों या हिन्दी के संज्ञा शब्द, सभी को प्रयोग करने से पहले लिंग से जोड़ना पड़ता है।

संज्ञा की परिभाषा जानने के बाद आइए जानते हैं कि संज्ञा कितने प्रकार की होती है।

संज्ञा के कितने भेद होते हैं?

संज्ञा के भेद उनके वर्गीकरण के आधार पर हैं। अधिकतर भाषा विद्वान संज्ञा के पाँच भेद मानते हैं-

  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा
  2. जातिवाचक संज्ञा
  3. भाववाचक संज्ञा
  4. समूहवाचक संज्ञा
  5. द्रव्यवाचक संज्ञा

संज्ञा शब्दों का उपर्युक्त वर्गीकरण वस्तु और धर्म की दृष्टि से किया गया है। संज्ञा शब्दों के ये भेद अँग्रेजी भाषा के व्याकरण के समान ही हैं।

व्यक्तिवाचक संज्ञा किसे कहते हैं?

जिन संज्ञा शब्दों से किसी एक विशेष व्यक्ति या वस्तु का बोध होता है, उसे ‘व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। ये किसी विशेष व्यक्ति या स्थान को बताने के लिए प्रयोग की जाती हैं। जैसे-गंगा, तुलसीदास, राम, हिमालय, अयोध्या इत्यादि।

यहाँ गंगा कहने से एक विशेष नदी का और तुलसीदास कहने से एक रामभक्त महाकवि का बोध होता है। राम कहने से एक व्यक्ति का और अयोध्या कहने से एक धार्मिक नगरी का बोध होता है। इसलिए ये शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञा हैं।

हिन्दी भाषा में व्यक्तिवाचक संज्ञाओं की संख्या जातिवाचक संज्ञाओं से अधिक है।

व्यक्तिवाचक संज्ञाओं के निम्नलिखित रूप पाए जाते हैं-

  1. सभी व्यक्तियों के नाम-गांधीजी, राम, विवेकानंद, कबीर आदि
  2. नदियों और झीलों के नाम-गंगा, यमुना, कावेरी, गोदावरि, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, डल, सरयू आदि।
  3. देशों के नाम-भारत, अमेरिका, रूस, जर्मनी, जापान आदि।
  4. दिशाओं के नाम-पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, इत्यादि।
  5. समुद्रों के नाम-हिन्द महासागर, प्रशांत महासागर, आदि।
  6. पर्वतों के नाम-हिमालय, विंध्याचल, अरावली, नीलगिरी, कैलाश आदि।
  7. शहरों, सड़कों, गाँव और चौकों आदि के नाम-दिल्ली, वाराणसी, पटना, चाँदनी चौक, हैदराबाद, गुरुग्राम, अशोक मार्ग, जनपथ आदि।
  8. किताबों, अखबारों और प्रकाशनों के नाम-रामचरितमानस, महाभारत, द हिन्दू, इंडियन एक्सप्रेस, दैनिक जागरण, पैंगविन प्रकाशन, अरिहंत प्रकाशन, जनगण हिन्दी आदि।
  9. राज्यों के नाम-उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, केरल, तेलंगाना आदि।
  10. गृह-नक्षत्रों के नाम-सूर्य, चंद्र, बृहस्पति, शनि, मंगल, रोहिणी, मार्गशीर्ष आदि।
  11. दिनों, महीनों के नाम-चैत्र, कार्तिक, अप्रैल, जून, जनवरी, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, रविवार आदि।
  12. त्योहारों और उत्सवों के नाम-होली, दीपावली, कार्तिक एकादशी, ईद, पोंगल, शिव-रात्रि, गुरु नानक जयंती, क्रिसमस आदि।
  13. ऐतिहासिक घटनाओं के नाम-1857 का विद्रोह, पानीपत की लड़ाई, बक्सर का युद्ध, अक्तूबर क्रान्ति, समुद्र-मंथन आदि।

जातिवाचक संज्ञा किसे कहते हैं?

जिन संज्ञा शब्दों से एक ही प्रकार के प्राणी अथवा वस्तुओं का बोध हो, उन्हे ‘जातिवाचक संज्ञा’ कहते हैं। इनसे किसी वस्तु या प्राणी की पूरी ‘जाति’ का पता चलता है। जैसे-पेड़, मनुष्य, गाय, घर, नदी इत्यादि।

यहाँ ‘पेड़’ कहने से संसार के सभी पेड़ों का, मनुष्य कहने से संसार के सभी मनुष्यों का और घर कहने से दुनिया के सभी घरों का पता चलता है। ध्यान देने की बात है कि पेड़, मनुष्य या गाय किसी एक विशेष के लिए इस्तेमाल नहीं हुआ है, बल्कि ये शब्द सम्पूर्ण जाती के लिए इस्तेमाल किया गया है।

जातिवाचक संज्ञाएँ निम्नलिखित रूपों में होती हैं-

  1. प्राकृतिक वस्तुओं के नाम-नदी, पहाड़, झरना, वायु, पुष्प, बिजली, वर्षा, भूकंप, ज्वालामुखी, भूमि इत्यादि।
  2. पशु-पक्षियों के नाम-तोता, गाय, मोर, घोड़ा, गधा, हिरण, गैंडा, सर्प, मछली इत्यादि।
  3. वस्तुओं के नाम-घर, टेबल, कलम, कम्प्युटर, मोबाइल, साइकल, कंबल, चादर, कुर्सी इत्यादि।
  4. संबंधियों, व्यवसायों, कार्यों, पदों और कार्यालयों के नाम-दामाद, ससुर, कॉलेज, विश्वविद्यालय, प्रोफेसर, शिक्षक, सचिवालय, दर्जी, गवर्नर, राष्ट्रपति, कलेक्टर, मंत्री इत्यादि।
  5. अनाज, मसाले, खाने की वस्तुओं के नाम-चावल, धान, गेहूं, मलाई, दूध, दहि, काली मिर्च, नमक इत्यादि।

जातिवाचक और व्यक्तिवाचक संज्ञाओं में भेद समझने के लिए एक उदाहरण देखिये-हिमालय एवं पहाड़, ये दो शब्द भिन्न हैं। पहला शब्द हिमालय एक विशेष पहाड़ को सूचित करता है, इसलिए हिमालय शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञा है। दूसरा शब्द ‘पहाड़’ संसार के सभी पहाड़ों का बोध कराता है। इसलिए पहाड़ शब्द जातिवाचक संज्ञा है।

ठीक ऐसे ही ‘गंगा’ शब्द से एक विशेष नदी का बोध होता है जो गंगोत्री से निकलकर गंगासागर में बंगाल की खड़ी में समुद्र में मिलती है। किन्तु नदी शब्द से संसार की सभी नदियों का बोध होता है। इसलिए नदी शब्द जातिवाचक संज्ञा है तथा गंगा शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञा शब्द है।

भाववाचक संज्ञा किसे कहते हैं?

जिन संज्ञा शब्दों से किसी व्यक्ति या वस्तु के गुण या धर्म, दशा अथवा अवस्था का बोध होता है, उन्हे ‘भाववाचक संज्ञा” कहते हैं। जैसे-अच्छाई, लंबाई, बुढ़ापा, नम्रता, चाल, गर्मी, बहाव इत्यादि।

भाववाचक संज्ञा शब्दों में निम्नलिखित प्रकार की क्रिया, गुण एवं भाव इत्यादि समाविष्ट होते हैं-

  1. गुण– सौन्दर्य, मूर्खता, मंदता, चतुराई, आदि।
  2. भाव– विनम्रता, मित्रता, शत्रुता आदि।
  3. माप-लंबाई, ऊंचाई, चौड़ाई, गहराई आदि।
  4. अवस्था-बुढ़ापा, जवानी, बचपन, आदि।
  5. क्रिया-चढ़ाई, बहाव, पढ़ाई, दौड़धूप लिखाई आदि।
  6. गति-फुर्ती, सुस्ती, विलंबता आदि।
  7. स्वाद-मिठास, खटास, कड़वापन, आदि।
  8. अमूर्त भावनाएँ-दया, करुणा, क्षोभ, ममता आदि।

भाववाचक संज्ञा का निर्माण कैसे होता है?

भाववाचक संज्ञाओं का निर्माण शब्दों में प्रत्यय लगाकर होता है। जब जातिवाचक संज्ञा, क्रिया, विशेषण, सर्वनाम, और अवव्य आदि में प्रत्यय लगाया जाता है तो वे भाववाचक संज्ञाओं में परिवर्तित हो जाते हैं। उदाहरण देखिये-

  • क्रिया से-

घबराना-घबहराहट

मारना-मार

दौड़ना-दौड़

चलना-चाल

  • जातिवाचक संज्ञा से-

लड़का-लड़कपन

शत्रु-शत्रुता

मित्र-मित्रता

  • विशेषण से-

गर्म-गर्मी

विनम्र-विनम्रता

मीठा-मिठास

  • सर्वनाम से-

मम-ममत्व

अपना-अपनापन

  • अवव्यय से-

समीप-सामीप्य

दूर-दूरी

भाववाचक संज्ञाओं को पहचानने का चिन्ह यह है कि उन शब्दों के माध्यम से किसी गुण, अवस्था, व्यापार या दशा का पता चलता है।

समूह वाचक संज्ञा किसे कहते हैं?

परिभाषा: जिन संज्ञा शब्दों से किसी वस्तु अथवा व्यक्ति के समूह का बोध हो, उसे ‘समूहवाचक संज्ञा’ कहा जाता है। ये शब्द पदार्थों, जीवों अथवा वस्तुओं के समूह का बोध कराती हैं। जैसे-दर्जन, दल, सभा, गिरोह, सेना, टोली, गुच्छा, मण्डल, सहस्त्र इत्यादि।

समूहवाचक संज्ञा शब्दों से किसी एक व्यक्ति या वस्तु का बोध नहीं होता है। उदाहरण के लिए जब हम हिमालय शब्द कहते हैं तो यह केवल एक विशेष पहाड़ के लिए इस्ल्तेमाल किया जाता है। यहाँ किसी समूह का बोध नहीं होता।

किन्तु जब हम भारतीय सेना का प्रयोग करते हैं तो इस शब्द में सम्पूर्ण भारतीय सेना के जवानों के समूह का बोध होता है। इसलिए ‘सेना’ शब्द समूहवाचक संज्ञा है किन्तु हिमालय शब्द समूहवाचक संज्ञा ना होकर व्यक्तिवाचक संज्ञा है।

द्रव्यवाचक संज्ञा किसे कहते हैं?

परिभाषा: किसी धातु, द्रव्य अथवा नाप-तौल वाली वस्तुओं का बोध कराने वाले संज्ञा शब्दों को ‘द्रव्यवाचक संज्ञा’ कहते हैं। जैसे-सोना, चाँदी, लोहा, घी, पीतल, पानी, दूध, तेल, शराब, मधु इत्यादि।

द्रव्यवचक संज्ञा शब्दों का समान्यतः बहुवचन नहीं होता है और इनके पूर्ण और अंश दोनों के लिए एक ही शब्द का प्रयोग होता है। जैसे-दूध शब्द एक द्रव्यवाचक संज्ञा है। यदि एक बूंद दूध होगी तो भी वह दूध ही कही जाएगी।

लोहे का एक टुकड़ा भी लोहा ही कहा जाता है। किन्तु जातिवाचक संज्ञाओं के पूर्ण और अंश के नामों में पर्याप्त भेद हो जाता है। उदाहरण के लिए किसी नदी के एक बूंद पानी को पूरी नदी नहीं कहा जाता।

संज्ञाओं के प्रयोग में परिवर्तन

कुछ संज्ञा शब्द इतने प्रचलित हो जाते हैं कि वे एक संज्ञा वर्ग से दूसरे संज्ञा वर्ग में प्रयोग किए जाने लगते हैं। उनके प्रयोग में उलट-फेर हो जाता है। निम्नलिखित उदाहरणों से यह बात स्पष्ट हो जाएगी-

  • जातिवाचक का व्यक्तिवाचक के रूप में-कुछ जातिवाचक संज्ञा शब्द बहुधा एक ही वस्तु के लिए प्रयोग में होने के कारण व्यक्तिवाचक के रूप में भी प्रयोग होने लगे हैं। जैसे-‘कृष्ण’ शब्द से भगवान श्री कृष्ण का और ‘गोस्वामी’ से गोस्वामी तुलसीदास जी का बोध होता है। अन्य उदाहरण-‘पुरी’ से जगन्नाथपुरी, ‘रघुवर’ से भगवान श्री राम का बोध होता है।
  • व्यक्तिवाचक का जातिवाचक संज्ञा के रूप में-कभी-कभी किसी व्यक्ति या वस्तु का असाधारण गुण या चरित्र प्रकट करने के लिए व्यक्तिवाचक संज्ञा शब्दों का जातिवाचक संज्ञा शब्दों में प्रयोग होने लगता है। जैसे-सरदार वल्लभभाई पटेल आधुनिक भारत के ‘बिरमार्क’ कहे जाते हैं। ‘वह कलियुग का ‘अर्जुन’ है। वह राजनीति का ‘चाणक्य’ है। यहाँ ‘बिस्मार्क, ‘अर्जुन’ और ‘चाणक्य’ शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञा होकर भी जातिवाचक के रूप में प्रयुक्त हुए हैं।
  • भाववाचक का जातिवाचक के रूप में– कहीं-कहीं भाववाचक संज्ञा प्रयोग की सुविधा के लिए जातिवाचक में बादल जाति हैं। जैसे-देश में कई बीमारियाँ फैली हुईं हैं। यहाँ ‘बीमारियाँ’ शब्द भाववाचक होकर भी जातिवाचक के रूप में प्रयोग हुआ है।

संज्ञा की परिभाषा कैसे लिखें?

संज्ञा किसे कहते हैं? अथवा संज्ञा की परिभाषा कैसे लिखा जाय -अत्यंत महत्वपूर्ण है | किसी भी वस्तु या सिद्धान्त की परिभाषा लिखने के लिए उस वस्तु या सिद्धान्त के गुण, धर्म और अवस्था इत्यादि पर विचार किया जाता है। आइए जानते हैं कि संज्ञा की परिभाषा कैसे लिखें-

  • संज्ञा की परिभाषा लिखने के लिए आपको संज्ञा के गुण, धर्म और विशेषता आदि को अपने षंडों में समेत कर परिभाषित करना होगा।
  • संज्ञा का गुण है किसी व्यक्ति या वस्तु का ‘बोध’ कराना। इसलिए संज्ञा की परिभाषा लिखते समय हमें व्यक्ति या वस्तु क्का बोध कराने की विशेषता को समाविष्ट करना होगा।
  • वस्तु के अंदर प्राणी, पदार्थ और धर्म समाहित होते हैं। इन्ही के आधार पर संज्ञा शब्दों का वर्गिकरण भी किया जाता है।

अब हम संज्ञा की परिभाषा ऐसे लिख सकते हैं

परिभाषा 1:संज्ञा’ उस शब्द को कहते हैं जिससे किसी विशेष वस्तु, स्थान, भाव, अथवा जीव के नाम का बोध होता है।“ अथवा

परिभाषा 2: संज्ञा वह विकारी शब्द है जिससे किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव इत्यादि का पता चलता है।“

संज्ञा को कैसे पहचाने?

संज्ञा शब्दों को पहचानना बहुत आसान है। इसके लिए सबसे पहले दिये गए शब्दों की जांच करें कि क्या वे किसी व्यक्ति का नाम हैं अथवा किसी पशु-पक्षी के नाम। उदाहरण के लिए राम शब्द से किसी व्यक्ति का पता चलता है। इसलिए राम शब्द एक संज्ञा शब्द है।

यदि आप संज्ञा पहचानना चाहते हैं तो किसी द्रव्य या समूह का बोध कराने वाले शब्द भी संज्ञा के अंतर्गत आते हैं। जैसे-सोना, लोहा, दर्जन, पाव, किलो, पसेरी, क्विंटल, गिरोह, दूध इत्यादि। जब ऐसे शब्द आपको दिखें तो निश्चित हो जाएँ कि वे संज्ञा शब्द ही हैं। संज्ञा शब्द निम्नलैखित होते हैं-

  1. सभी व्यक्तियों के नाम
  2. नदियों और झीलों के नाम
  3. देशों के नाम
  4. दिशाओं के नाम
  5. समुद्रों के नाम
  6. पर्वतों के नाम
  7. शहरों, सड़कों, गाँव और चौकों आदि के नाम
  8. किताबों, अखबारों और प्रकाशनों के नाम
  9. राज्यों के नाम
  10. गृह-नक्षत्रों के नाम
  11. दिनों, महीनों के नाम
  12. त्योहारों और उत्सवों के नाम
  13. ऐतिहासिक घटनाओं के नाम
  14. प्राकृतिक वस्तुओं के नाम
  15. पशु-पक्षियों के नाम
  16. वस्तुओं के नाम
  17. संबंधियों, व्यवसायों, कार्यों, पदों और कार्यालयों के नाम
  18. अनाज, मसाले, खाने की वस्तुओं के नाम

संज्ञा के उदाहरण

संज्ञा के उदाहरण ये हैं-आम, गंगा, घर, कमल, दया, इन्द्र, पानी, गंगा, तुलसीदास, राम, हिमालय, अयोध्या, बसंत पंचमी, इत्यादि। संज्ञा (Sangya) के अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं-

  1. व्यक्तियों के नाम-कृष्ण, राम, विवेकानंद, कबीर आदि
  2. विश्व की नदियों और झीलों के नाम-गंगा, यमुना, कावेरी, गोदावरि, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, डल, सरयू आदि।
  3. दुनिया के देशों के नाम-भारत, अमेरिका, रूस, जर्मनी, जापान आदि।
  4. सभी दिशाओं के नाम-पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, इत्यादि।
  5. संसार के समुद्रों के नाम-हिन्द महासागर, प्रशांत महासागर, आदि।
  6. धरातल के पर्वतों के नाम-हिमालय, विंध्याचल, अरावली, नीलगिरी, कैलाश आदि।
  7. शहरों, सड़कों, गाँव और चौकों आदि के नाम-दिल्ली, वाराणसी, पटना, चाँदनी चौक, हैदराबाद, गुरुग्राम, अशोक मार्ग, जनपथ आदि।
  8. पुस्तकों, अखबारों और प्रकाशनों के नामरामचरितमानस, महाभारत, द हिन्दू, इंडियन एक्सप्रेस, दैनिक जागरण, पैंगविन प्रकाशन, अरिहंत प्रकाशन, जनगण हिन्दी आदि।
  9. राज्यों के नाम-उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, केरल, तेलंगाना आदि।
  10. गृह-नक्षत्रों के नाम-सूर्य, चंद्र, बृहस्पति, शनि, मंगल, रोहिणी, मार्गशीर्ष आदि।
  11. दिनों, महीनों के नाम-चैत्र, कार्तिक, अप्रैल, जून, जनवरी, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, रविवार आदि।
  12. त्योहारों और उत्सवों के नाम-होली, दीपावली, कार्तिक एकादशी, ईद, पोंगल, शिव-रात्रि, गुरु नानक जयंती, क्रिसमस आदि।
  13. विश्व की ऐतिहासिक घटनाओं के नाम-1857 का विद्रोह, पानीपत की लड़ाई, बक्सर का युद्ध, अक्तूबर क्रान्ति, समुद्र-मंथन आदि।
  14. वैज्ञानिक शब्दावली-मीटर, इलेक्ट्रॉन, दूरबीन, टैब्लेट, सिरप, हैल्थ इत्यादि।

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