You are currently viewing योग भगाये रोग

योग भगाये रोग

योग का तात्पर्य है जुड़ना | प्रश्न है आखिर किससे जुड़ना ? योग मनुष्य को ईश्वर या परम सत्य से जुड़ने की प्रक्रिया है | योग भारतीय संस्कृति की पुरातन परम्परा की सम्पूर्ण विश्व को एक अप्रतिम देन है | महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित अष्टांगिक योग सम्पूर्ण विश्व को एक महान विरासत है | अष्टांग योग के तहत यम , नियम , आसन ,प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान और समाधि शामिल है | सामान्यतः लोग योग का अर्थ शरीर के द्वारा किये जाने वाले विभिन्न आसनों तक ही सीमित रखते है | केवल विभिन्न शारीरिक मुद्रा एवं आसन योग नहीं है | अष्टांग योग के आठों तत्व समेकित रूप में आत्मा का परम सत्य के साथ योग या जुड़ाव का मार्ग प्रशस्त करते है | मनुष्य का शारीरिक , मानसिक और आत्मिक रूप में संतुलन एवं समन्वय ही योग की आधारभूत संकल्पना है |

योग का आध्यत्मिक अभिप्राय इसे आत्मा की शुद्धता और संतुलन पर बल देता है | यद्पि पुरातन काल से लेकर समकालीन समय तक मनुष्य को रोगों से मुक्त रखने और शरीर को स्वस्थ बनाये रखने में योग का अमूल्य योगदान रहा है | शरीर एक उच्च स्तर का महत्वपूर्ण तंत्र है जिसमे शरीर के विभिन्न घटकों एवं मन के मध्य का संतुलन इसे स्वस्थ बनाये रखता है | इस शरीर तंत्र के अंदर प्राकृतिक रूप में किसी प्रकार के असंतुलन के फलतः उत्पन्न रोग से लड़ने की क्षमता विद्यमान है | इस शरीर के अंदर आतंरिक अथवा बाह्य किसी भी प्रकार के कारणों से उत्पन्न असंतुलन ही रोग को जन्म देता है | सामान्यतः इसे ही शरीर की रोग निरोधक क्षमता या इम्युनिटी(Immunity ) के रूप में जाना जाता है | मनुष्य की आधुनिक जीवन -शैली , आहार -व्यवहार में असंतुलन , प्रकृति के विरुद्ध जीवन , मनोवैज्ञानिक कारण , वाह्य वातावरण ये सभी सम्मिलत रूप में शरीर के अंदर रोग उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी है | योग, शरीर और मन के मध्य संतुलन स्थापित कर रोगों का निवारण करता है | वैज्ञानिक शोध एवं मनोविज्ञान इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य को स्थापित करते है की मनुष्य के अंदर दो -तिहाई बीमारियों का स्वरुप साइको -सोमेटिक (psychosomatic ) होता है अर्थात ये बीमारियाँ मन में उत्पन्न किसी विकृति के फलतः होती है | तनाव (stress ) और अवसाद (anxiety ) अनेक साइको -सोमेटिक बीमारियों का प्रमुख कारण है | योग एवं विभिन्न योगासन शरीर के अंदर टोक्सिन के स्तर को कम करतें है तथा ब्रेन के अंदर सकारात्मक केमिकल्स (dopamine ) को उत्पन्न करते है जिससे तनाव और अवसाद में कमी आती है | योग एवं योगासन के द्वारा dopamine के स्तर को संतुलित बनाये रखने में मदद मिलती है |


प्राणायाम , योग की विशेष प्रक्रिया है जिसके तहत प्राण अर्थात साँस का आयाम (regulation) किया जाता है | प्राणायाम के तहत शुद्ध सांस को विशेष प्रकार से शरीर के अंदर सभी अंगों तक पहुँचाया जाता है |पतंजलि अष्टांग योग तहत प्राणायाम के तहत अनेक प्रकार एवं मुद्रा है जिसका अभ्यास विभिन्न रोगों के समाधान में किया जा सकता है | यदि किसी को thyroid की बीमारी है तो भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास इससे मुक्ति दिला सकता है | रक्त सम्बन्धी किसी रोग की स्थिति में भ्रस्त्रिका प्राणायाम इस रोग से मुक्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | आधुनिक जीवन शैली, प्रदुषण, शारीरिक श्रम की कमी इत्यादि के कारण फलतः मनुष्य सम्यक तरीके से सांस लेना भी भूल गया है जो अनेक रोगों का कारण है | गहरे ढंग से साँस लेने से शरीर के सभी अंगों तक शुद्ध वायु प्राप्त हो पाती है| योग और विभिन्न योगासन साँस के आयाम को ठीक कर अनेक रोगो से मुक्त हो सकते है |


कपालभाँति , योग की विशेष प्रक्रिया है जिसके तहत साँसों को तीव्र गति से नासिका द्वारा फेंका जाता है | कपालभांति के तहत सम्यक अभ्यास से कपाल (forehead ) पर एक विशेष चमक (shining ) आती है | तीव्र गति से सांस को बाहर फेंकने की प्रक्रिया में फेंफड़ो की क्षमता में वृद्धि , हृदय के अंदर किसी प्रकार की अवरोध (blockage ) का दूर होना, शुद्ध रक्त का शरीर के विभिन्न अंगो तक पहुंचना सुनिश्चित हो पाता है | कपालभांति के निरंतर अभ्यास से मान्यता है की जीवन शैली से जुड़ी बीमारियां यथा-डायबिटीज (diabetes ) , ब्लड प्रेशर (blood pressure ) तक का निवारण संभव है | योग साधको द्वारा यह मान्यता है की इसके निरंतर अभ्यास से रक्त की अशुद्धियाँ ठीक हो सकती है तथा कैंसर जैसी घातक बीमारी को भी हराया जा सकता है | इसके अभ्यास से अस्थमा , मोटापा , अनिद्रा एवं पेट सम्बन्धी अनेक रोगो से मुक्ति मिलती है | मान्यता है की महर्षि पतंजलि ने 195 सूत्रों को इकठ्ठा कर अष्टांग योग का प्रतिपादन किया था | कालांतर में अनेक योग साधकों ने इसमें अपने -अपने संशोधन प्रस्तुत किये तथा अनेक शारीरिक मुद्रा (yoga postures ) का समावेश किया | यद्पि महर्षि पतंजलि प्रतिपादित मूल स्वरुप ही योग-दर्शन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है |

courtesy: google images

Leave a Reply