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मधुमेह के लक्षण

मधुमेह के लक्षण

मधुमेह के लक्षण को जानकर समय रहते इस बीमारी का ईलाज़ करने में मदद मिलती है | मधुमेह आधुनिक समय के सबसे गंभीर और जीवनशैली से जुड़ी महत्वपूर्ण बीमारी के रूप में पूरी मानवता के सामने खड़ी है | मधुमेह को सामान्यतः शुगर या डायबिटीज भी कहा जाता है |

वस्तुतः मधुमेह रोग शरीर के रक्त में शुगर की मात्रा एक मानक से ज्यादा होने की स्थिति है | शुगर हमारे जीवन हमारे शरीर में कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख स्रोत है जो हमें आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है | जब भी हम भोजन करते हैं तो कार्बोहाइड्रेट शुगर के रूप में हमारे रक्त में जाता है और शरीर के विभिन्न कोशिकाओं तक पहुंचता है ताकि शरीर को आवश्यक ऊर्जा मिल सके |

प्राकृतिक रूप से हमारे शरीर में पैंक्रियास में स्थित बीटा सेल से इंसुलिन नामक हार्मोन का स्राव होता है जो रक्त में शुगर को पच|ता है | यदि किसी कारणवश इंसुलिन का स्राव ना हो तो रक्त में स्थित शुगर पच नहीं पाता तथा रक्त में उसकी अधिक मात्रा ही मधुमेह या डायबिटीज कहलाते हैं|



मधुमेह टाइप 2

मधुमेह रोग मुख्य तक दो प्रकार के होते हैं | जिसे सामान्यता मेडिकल साइंस में – टाइप वन डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज के नाम से जाना जाता है | टाइप वन डायबिटीज अनुवांशिक डायबिटीज होती है जिसमें जन्म के साथ ही पैंक्रियाज से इंसुलिन हार्मोन का स्राव नहीं होता जिस कारण शरीर में बनने वाले शुगर का पाचन ही नहीं हो पाता | अनुवांशिक कारण परिवार में माता पिता या अन्य में उत्पन्न बीमारी के कारण आने वाली संतान में पाए जाते हैं | दूसरा प्रकार टाइप टू डायबिटीज है जो सामान्यतः लाइफस्टाइल डायबिटीज भी कहा जाता है| टाइप टू डायबिटीज मुख्यता मनुष्य के जीवन शैली और अन्य कई कारणों का परिणाम है | टाइप टू डायबिटीज समानता प्रौढ़ावस्था में पाया जाता है हालाकी आधुनिक जीवन शैली एवं वर्तमान युग में बहुत ही कम युवा वर्ग में भी टाइप टू डायबिटीज एक महामारी के रूप में पाया जाने लगा है|


मधुमेह के कारण


मधुमेह की बीमारी कई कारणों का सम्मिलित परिणाम है | मधुमेह के कारणों में किसी विशेष कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता बल्कि कई कारण एक साथ मिलकर प्रभावी बनते हैं तो मधुमेह के रोग की उत्पत्ति होती है |


अनुवांशिक कारण


मधुमेह के रोग में अनुवांशिक कारणों को सर्वाधिक प्रमुखता दी जाती है | यदि माता-पिता अथवा किसी पूर्वज को पूर्व से ही मधुमेह की बीमारी है तो एक विशेष संभावना बनी रहती है की संतान को भी मधुमेह की बीमारी हो सकती हैं|


जीवनशैली कारण

मनुष्य प्रकृति की उपज है और प्रकृति में ही समाप्त हो जाता है | परंपरागत रूप से मनुष्य का शरीर प्रकृति के अनुरूप था तथा श्रम पर आधारित था | मनुष्य को भोजन आसानी से प्राप्त नहीं था तथा उसे कृषि अथवा शिकार कर भोजन को प्राप्त करना होता था | मनुष्य को आवागमन के लिए भी पैदल या अन्य छोटे साधनों से यात्रा को अंजाम देना होता था | आधुनिक जीवन शैली ने मनुष्य की प्राकृतिक अवस्था में आमूलचूल परिवर्तन ला दिया | कृषि एवं कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था अब घर की चारदीवारी मैं बंद हो गई है | मनुष्य के जीवन में श्रम खत्म सा होने लगा है | मनुष्य पूर्व में प्रकृति के अनुरूप जल्दी से सोना और जल्दी से उठना जैसे नियमों का पालन करता था | आधुनिक जीवन शैली ने और सभी प्राकृतिक नियमों की अनदेखी कर दी है | संभवतः इसी का नतीजा है कि वर्तमान समय में कम युवा वर्ग के लोगों में इंसुलिन हार्मोन का स्राव बंद होने लगा है या कम मात्रा में होता है जिस कारण मधुमेह जैसी बीमारी का जन्म हो रहा है|


विटामिन डी की कमी


वर्तमान शोध और अनुसंधान में यह पाया गया है कि मधुमेह की बीमारी और शरीर में विटामिन डी की कमी के बीच संबंध स्थापित होने लगा है | आधुनिक जीवन शैली में मनुष्य प्राकृतिक धूप से वंचित होने लगा है जिस कारण शरीर में प्राकृतिक रूप से विटामिन डी का निर्माण नहीं हो पाता है|


विटामिंस और मिनरल्स की कमी


शरीर में यदि किसी कारणवश विटामिंस और मिनरल्स की कमी होने लगे तो यह भी मधुमेह की बीमारी के कारणों में सहायक हो सकते हैं

मोटापा


मोटापा भी मधुमेह की बीमारी का एक प्रमुख कारण है | दरअसल दरअसल मोटापा शरीर के बाहरी सतह पर अनावश्यक रूप से जमा फैट्स है | शरीर में जब अनावश्यक रूप से फैट्स जमा होने लगते हैं तो यह पैंक्रियास के बीटा सेल्स के ऊपर भी लेयर बना देते हैं जिस कारण से पेनक्रियाज से बीटा सेल का स्राव बंद होने लगता है|

मधुमेह के लक्षण


मधुमेह रोग की जब शरीर में उत्पत्ति होती है तो कई सारे महत्वपूर्ण लक्षण उभरने लगते हैं | मधुमेह के लक्षण को जानकर इस बीमारी का ईलाज़ करने में मदद मिलती है |

  • पेशाब का बार बार आना
  • थकान का महसूस होना
  • गला सूखना
  • बार-बार प्यास लगना
  • शरीर का वजन बढ़ना या घटना
  • कमजोरी का अनुभव होना चक्कर आना

मधुमेह का इलाज


आधुनिक मेडिकल साइंस इतना एडवांस होने के बावजूद भी अभी तक मधुमेह का कोई सफल इलाज नहीं ढूंढ पाई है लेकिन जीवन शैली मैं आवश्यक सुधार कर मधुमेह के रोग को नियंत्रित किया जा सकता है और एक सफल और स्वास्थ्य जीवन जिया जा सकता है | टाइप वन डायबिटीज अनुवांशिक रोग है जिसमें इंजेक्शन के माध्यम से शरीर में इंसुलिन दिया जाता है ताकि चीनी का पाचन हो सके तथा शरीर को आवश्यक ऊर्जा सके | टाइप टू डायबिटीज असंतुलित जीवन शैली से प्रमुख रूप से जुड़ा हुआ रोग है | अतः जीवन शैली में आवश्यक सुधार कर इसका इलाज किया जा सकता है|

वजन को नियंत्रित रखना


बेहतर खानपान और एक्सरसाइज के द्वारा हम अपने वजन को कम तथा नियंत्रित रख सकते हैं | शरीर की लंबाई और वजन में एक निश्चित अनुपात को बीएमआई कहा जाता है | एक संतुलित और नॉरमल बीएमआई मधुमेह को नियंत्रित करने में बहुत ही महत्वपूर्ण है |


शारीरिक श्रम और एक्सरसाइज


हमारा शरीर प्रकृति की उपज है तथा उसी के अनुरूप सहज जीवन जीने से इंसुलिन का स्राव संतुलित बना रहता है | शारीरिक गतिविधि या एक्सरसाइज करने से पेनक्रियाज एक्टिव बना रहता है तथा जरूरी मात्रा में इंसुलिन का निर्माण करता है |


संतुलित भोजन


हमारा भोजन संतुलित होना चाहिए | भोजन में सभी तत्वों का समुचित मेल होना चाहिए तथा भोजन छोटे-छोटे अंतराल पर करना चाहिए | खाने की प्लेट में 25% रूल का पालन करना चाहिए | यदि थाली में चार कटोरी हो तो एक कटोरी चावल, एक कटोरी दाल, एक कटोरी सब्जी और एक कटोरी सलाद होना चाहिए| भोजन में सब्जी और सलाद का ज्यादा सेवन करने से शरीर में शुगर की मात्रा संतुलित बनी रहती है | सुबह का ब्रेकफास्ट 9:00 से 10:00 बजे सुबह के बीच और रात्रि का भोजन 9:00 बजे से पहले हो जाना चाहिए |


विटामिन डी


शरीर में विटामिन डी की मात्रा पर्याप्त होनी चाहिए | यदि प्राकृतिक रूप से विटामिन डी शरीर को नहीं मिल पाता है तो विटामिन डी की गोली या इंजेक्शन चिकित्सीय परामर्श के अनुसार लेनी चाहिए|


विटामिंस मिनरल्स युक्त भोजन


जो भी भोजन हम खाते हैं उस भोजन में पर्याप्त रूप से विटामिंस और मिनरल्स होने चाहिए | जंक फूड, फ्राइड फूड और तला हुआ भोजन से परहेज करना चाहिए|


ब्रिस्क वॉकिंग


दुनिया के सभी चिकित्सा पद्धति एकमत मानती है की मधुमेह के रोगियों को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट ब्रिस्क वाकिंग करना चाहिए | इसके संदर्भ में यह भ्रांति है की बहुत ज्यादा टहलने से मधुमेह शीघ्र दूर हो जाता है जो सही नहीं है बल्कि इसके नुकसान भी हो सकते हैं | चिकित्सीय मत है कि लगभग 30 मिनट तक सामान्य से अधिक गति से टहलना मधुमेह के रोगियों के लिए सर्वोत्तम दवा है

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