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भाग्यशाली हस्त रेखा

भाग्यशाली हस्त रेखा

हाथ में बनने वाली हस्त रेखा से मनुष्य के भाग्य और जीवन के बारे में पता चलता है। हस्त रेखाएँ अलग-अलग बनावट की होती हैं जिनका फल और गुण-दोष अलग-अलग होता है।

श्रुति कहती है कि “यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे” अर्थात “जो इस मनुष्य शरीर में है वही ब्रह्मांड में है”। भारत में हस्त-रेखा का विज्ञान हजारों वर्षों से रहा है जिसके अध्ययन से भाग्यशाली हस्त रेखा की पहचान की जा सकती है।

हस्त रेखा क्या है?

मनुष्य की हथेली में बनने वाली रेखाओं को हस्त रेखा कहते हैं। हस्त रेखा सबकी अलग-अलग होती है और इनसे जातक के भूत, भविष्य और व्यक्तित्व इत्यादि का पता चलता है।

मुख्य हस्त रेखाएँ:

  1. आयु या हृदय रेखा,
  2. जीवन रेखा,
  3. विवाह रेखा,
  4. भाग्य रेखा,
  5. सूर्य रेखा,
  6. स्वास्थ्य रेखा
  7. शीर्ष रेखा (मस्तक रेखा)

इसके अतिरिक्त मंगल रेखा और यात्रा इत्यादि रेखाएँ भी व्यक्ति के हाथ में होती हैं।

हस्त रेखा विज्ञान

हस्त रेखा विज्ञान से तात्पर्य है हाथों की रेखाओं को पढ़कर किसी मनुष्य के भूत भविष्य और व्यक्तित्व के बारे में पता लगाना। इसे विज्ञान इसलिए कहा जाता है क्योंकि अन्य विज्ञानों की भांति हस्त रेखा विज्ञान भी शास्त्र और परीक्षण पर आधारित है।

हस्त रेखा विज्ञान का उल्लेख, स्कन्द पुराण, भविष्य पुराण, स्कान्द शारीरक शास्त्र, गरुड पुराण इत्यादि ग्रन्थों में किया गया है। इसके अतिरिक्त समुद्र ऋषि एवं वराह मिहिर इत्यादि आचार्यों ने भी हस्त रेखा विज्ञान के बारे में लिखा है।

ज्योतिष और हस्त रेखा विज्ञान

हस्त रेखा विज्ञान (Palmistry) ज्योतिष शास्त्र का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। हस्तरेखा ज्योतिष के उस भाग को कहा जाता है जिसमें जातक के हाथ की हथेली के विभिन्न लक्षणों और रेखाओं को देखकर उसके भाग्य, व्यक्तित्व एवं प्रकृति के बारे में बताया जाता है।

भारतीय ज्योतिष में ना सिर्फ रंग रूप बल्कि शरीर पर पाये जाने वाले चिन्हों के अनुसार भी फलादेश वाचा जाता है। उदाहरण के लिए जिन व्यक्तियों की हथेली में सूर्य, शुक्र, गुरु, औ बुध पर्वत पुष्ट और उभरे हुए होते हैं उनमें राजलक्ष्मी योग होता है।

राजयोग भाग्यशाली हस्त रेखा

व्यक्ति के हाथ की जिस रेखा से उसके राजयोग भाग्य का पता चलता है उसे राजयोग भाग्यशाली हस्त रेखा कहते हैं। राजयोग भाग्यशाली हस्त रेखा हथेली में मणिबंध (हथेली के शुरू होने का स्थान, कलाई के पास) के कुछ ऊपर से शुरू होकर मध्यमा या तर्जनी के मूल तक जाती है।

समुद्र ऋषि के अनुसार यह रेखा राज्यश्री, रत्न, और सुवर्ण देने वाली होती है। इस रेखा को संस्कृत में ऊर्ध्व रेखा कहा जाता है।

स्कान्द शारीरिक शास्त्र के मतानुसार अगर भाग्य रेखा शुरू में जीवन रेखा से मिली हो तथा इसके प्रारम्भ में शख का चिन्ह स्थित हो तो ऐसे जातक की विभूति और वैभव-समृद्धि इतनी अधिक होती है कि दूसरे लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं।

अगर भाग्य या ऊर्ध्व रेखा अंगूठे और तर्जनी के बीच में जाकर समाप्त हो एवं अखंडित और स्पष्ट हो तो मनुष्य को राजयोग दिलाती है। ऐसा मनुष्य राजा बंता है। यही राजयोग का कारण माना जाता है।

बहुत से हाथों में भाग्य रेखा नहीं होती या बहुत धुंधली होती है। किन्तु इसका यह अर्थ नहीं है कि ऐसे मनुष्य का भाग्योदय नहीं होगा या वे सफल नहीं हो सकते। वास्तव में ऐसे बहुत से व्यक्ति हैं जो आर्थिक रूप से सम्पन्न हैं या जो भाग्यशाली हैं किन्तु उनके हाथ में शनि रेखा नहीं है।

भाग्य रेखा का नहीं होना इस बात का सूचक है कि ऐसे व्यक्ति बहुत साधारण स्थितियों में पैदा हुए थे। उनका बचपन ऐसी परिस्थितियों में गुजरा जिसमें धन का अभाव था। उन्हे उत्तराधिकार में संपत्ति और व्यापार इत्यादि नहीं प्राप्त हुआ।

किन्तु ऐसे लोग सिर्फ अपने परिश्रम और ज्ञान से धीरे-धीरे उन्नति और विकास प्राप्त किए हैं। उनके जीवन में ऐसा कोई बाहरी विकल्प, साधन या सहारा नहीं मिला जिसे “भाग्य” कहा जाता।  जिनके हाथ में भाग्य रेखा नहीं होती वे अपने भाग्य के स्वयं निर्माता होते हैं।

प्यार की हस्त रेखा

प्यार की हस्त रेखा हमारी हथेली की कनिष्ठिका (कानी उंगली) के नीचे और हृदय रेखा के ऊपर के भाग में स्थित होती है। इसे ही भारतीय मत में विवाह रेखा कहा जाता है।

यह रेखा हाथ के बाहरी भाग से प्रारम्भ होकर बुध के क्षेत्र तक आती है। विवाह रेखा एक से अधिक हो सकती हैं।

विवाह हस्त-रेखा को ही पाश्चात्य विद्वान प्यार या प्रेम की हस्त रेखा कहते हैं। यह इसलिए क्योंकि बहुत से मनुष्य ऐसे भी होते हैं जिनके हाथ में तो विवाह रेखा होती है किन्तु वे आजीवन अविवाहित रहते हैं। किन्तु अविवाहित लोगों के जीवन में भी प्रेम संबंध रहे।

इसलिए पश्चिमी देशों में इस विवाह रेखा को प्रेम या प्यार की हस्त रेखा माना जाता है। हालांकि भारतवर्ष में अधिकतर लोग विवाह करते हैं और भारतीय मत के अनुसार इसे विवाह रेखा कहना ही उचित माना जाता है।

प्यार की हस्त रेखा या विवाह रेखा के लक्षण:

  • हाथ में एक से अधिक विवाह रेखा का अर्थ एक से अधिक विवाह या एक से अधिक प्रेम संबंध होता है।
  • पुरुष के हाथ में जितनी विवाह रेखा होंगी उसके उतनी स्त्रियॉं से संबंध होंगे।
  • ठीक इसी प्रकार स्त्रियॉं के हाथों में भी जितनी विवाह रेखा होंगी उतने ही उसके पति या प्रेमी होंगे।
  • यदि विवाह रेखा की संख्या विषम हो तो अपने से नीचे की कुल की स्त्री से विवाह होता है और यदि सम संख्या हो तो अपने समान कुल की स्त्री से विवाह या संबंध होता है।
  • समुद्र ऋषि का माँट है कि यदि विवाह या प्यार की हस्त रेखा सुंदर, सूक्ष्म, दीर्घ हो तो ऐसे व्यक्ति का विवाह उस कन्या से होता है जिसका पहले विवाह ना हुआ हो।
  • विवाह रेखा हृदय रेखा और कनिष्ठिका के मध्य से नीचे की ओर हो तो व्यक्ति का विवाह जवानी की शुरुआत में ही हो जाता है। अर्थात विवाह रेखा हृदय रेखा के जितनी पास हो उतनी जल्दी विवाह होता है।
  • विवाह रेखा यदि कनिष्ठिका और हृदय रेखा के मध्य के ऊपर वाले भाग में हो तो विवाह भी ढलती जवानी में ज्यादा उम्र में होता है।

विवाह रेखा के किसी एक लक्षण को देखकर किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सकता। पूर्ण फलादेश के लिए जातक या व्यक्ति के स्वभाव, जाती, प्रकृति, और अन्य लक्षणों पर ध्यान देना आवश्यक होता है। विभिन्न ग्रहों के प्रभाव के कारण भी लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।

सरकारी नौकरी की हस्त रेखा

किसी व्यक्ति के जीवन में सरकारी नौकरी मिलेगी या नहीं इस ओर भी हस्त रेखाएँ इशारा करती हैं। सरकारी नौकरी की हस्त रेखा आपके कैरियर में सरकारी नौकरी या प्रशासनिक पद का योग बनाती है। आइए जानते हैं कि कौन सी हस्त रेखा से व्यक्ति के सरकारी नौकरी प्राप्त करने का योग बनता है:

  • भाग्य रेखा यदि बृहस्पति पर्वत की ओर घूमी हो

किसी व्यक्ति के हाथ में यदि भाग्य रेखा गुरु पर्वत या बृहस्पति क्षेत्र की ओर घूमी हो तो ऐसा व्यक्ति अत्यधिक सफल होता है। गुरु पर्वत पर सीधी या खड़ी रेखा होने से व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिलने की बहुत संभावना होती है।

यदि भाग्य रेखा से कोई रेखा निकालकर गुरु पर्वत की ओर जा रही हो और किसी अन्य रेखा को ना काटे तो भी सरकारी नौकरी की पूरी संभावना होती है।

  • भाग्य रेखा से शाखा रेखा निकालकर सूर्य पर्वत की रेखा से मिले

ऐसे व्यक्ति जिनके हाथ में सूर्य पर्वत पर सीधी रेखा स्थित हो और सूर्य क्षेत्र उभरा हुआ हो तो वे सरकारी नौकरी प्राप्त करते हैं। यदि भाग्य रेखा से कोई शाखा रेखा निकलकर सूर्य पर्वत की किसी सीधी रेखा से मिल जाए तो भी सरकारी नौकरी की पूरी संभावना होती है।

  • जीवन रेखा से निकालकर कोई रेखा सूर्य पर्वत की ओर जा रही हो

जिन व्यक्तियों के हाथों में जीवन रेखा से निकालकर कोई रेखा सूर्य पर्वत की ओर जाती हो ऐसे व्यक्ति भी सरकारी नौकरी प्राप्त करते हैं।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि सरकारी नौकरी के लिए व्यक्ति के हाथ में सूर्य और गुरु पर्वत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनके मजबूत होने से ही उच्च पद की प्राप्ति होती है।

निष्कर्ष

भाग्यशाली हस्त रेखा के बारे में विचार करते समय ध्यान रखना चाहिए कि गहरी और स्पष्ट रेखा ही भाग्योदय में सहायक होती है। हथेली की अन्य रेखाओं की तुलना में हल्की और पतली भाग्यरेखा भाग्य वृद्धि में ज्यादा सहायक नहीं मानी जाती।

किसी मनुष्य की किसी एक रेखा को आधार बनाकर ही फलादेश नहीं किया जा सकता। उसके अन्य लक्षणों और गुणों को ध्यान में रखकर समग्र रूप से विचार किया जाना चाहिए।

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