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Heatlth concept illustration of an earth world globe with a stethoscope wrapped around it.

जलवायु परिवर्तन एवं स्वास्थ्य|Global Warming and Health

जलवायु परिवर्तन को 21 वीं सदी का सबसे बड़ा वैश्विक स्वास्थ्य खतरा माना जाता है। मानव स्वास्थ्य हमेशा जलवायु और मौसम से प्रभावित रहा है। जलवायु परिवर्तन, खास तौर से मौसम के चरम में परिवर्तन, पर्यावरण को प्रभावित करता हैं जो हमें साफ हवा, भोजन, पानी, घर और सुरक्षा प्रदान करता हैं। जलवायु परिवर्तन, दुसरे प्राकृतिक और मानव द्वारा बनाए गए स्वास्थ्य तनाव के साथ मिलकर, मानव स्वास्थ्य कई तरीकों से खतरा पहुचाता है। 2030 और 2050 के बीच, जलवायु परिवर्तन से हर साल लगभग 250,000 ज़्यादा मौतें होने की संभावना है केवल कुपोषण, मलेरिया, दस्त और गर्मी के कारण।

जलवायु परिवर्तन पुरे ग्लोब में या किसी विशेष क्षेत्र में लंबे समय तक सामान्य स्थितियों में बदलाव, जैसे कि तापमान और बारिश मे बदलाव, को कहते है । नासा के वैज्ञानिकों ने देखा है कि पृथ्वी की सतह गर्म हो रही है और पिछले 20 वर्षों में अभी तक के सबसे गर्म साल हुए हैं। जलवायु परिवर्तन से शारीरिक, मानसिक और सामुदायिक स्वास्थ्य पर कई तरह के प्रभाव पड़ सकता हैं। गर्म जलवायु के कारण ज़्यादा गर्मी और खराब वायु की वजह से बीमारियों और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। जलवायु परिवर्तन से प्राकृतिक घटनाओ, जैसे बाढ़, सूखा, और तूफान की शक्ति बढ़ती है और साथ ही उनके बार-बार आने का खतरा भी रहता है, जो मानव स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। यह अधिक लोगों मे बीमारी होने के खतरे को भी बढ़ा सकता है। और लोगों के कुछ समूह (जैसे, बच्चे और बहुत बूढ़ों ) के स्वास्थ्य को खास तौर पर प्रभावित कर सकता है। जलवायु परिवर्तन सामाजिक और प्राकृतिक निर्धारकों को भी प्रभावित करता है | यथा – साफ हवा, सुरक्षित पीने का पानी, पर्याप्त भोजन और रहने का सुरक्षित स्थान।
1) तापमान-संबंधित प्रभाव : गर्म औसत तापमान, गर्म दिन और लगातार और लंबी गर्मी की लहरों को जन्म देगा। ज़्यादा गर्मी के संपर्क में आने से हीट स्ट्रोक और निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) जैसी समस्याएं हो सकती है, साथ ही हृदय, सांस और मस्तिष्क संबंधी रोग भी हो सकते हैं। इन बदलावों के कारण गर्मी से संबंधित मौतों में बढ़त होगी | एक आकलन के मुताबिक केवल अमेरिका में ही गर्मियों के महीनों के दौरान सदी के अंत तक हर साल हजार से कई हजार ज़्यादा मौतें हो सकती हैं।
2) वायु के गुणों का प्रभाव : जलवायु में परिवर्तन घर के अंदर और बाहर दोनों तरफ की हवा को प्रभावित करता हैं, जिससे अस्थमा के दौरे और अन्य श्वसन और हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। बढ़ती कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर और गर्म तापमान हवा द्वारा पैदा एलर्जी को भी प्रभावित करते हैं ।
3) ओजोन में वृद्धि : जो लोग ओजोन की जमीनी स्तर की परत के उच्च स्तर के संपर्क में आते है, उन्हें समय से पहले मर जाने का खतरा होता है या उन्हें फेफड़े के टिश्यू के क्षतिग्रस्त होने का, फेफड़ों के कम कार्य करने का और वायुमार्ग की सूजन जैसी श्वसन समस्याओं के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। इससे अस्थमा या फेफड़ों के अन्य रोग होने का खतरा भी बढ़ जाता है ।
4) पार्टिकुलेट मैटर में बदलाव : इन कणों के हमारे शरीर के अंदर जाने से कई प्रकार के स्वास्थ्य सम्बन्धित समस्याएं हो सकती है , जिसमें फेफड़े का कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और हृदय रोग शामिल हैं।

जलवायु परिवर्तन को काम करने में आप क्या भूमिका निभा सकते है ? कभी सोचा है ?

1) अपनी आवाज उठाए : पूरी दुनिया मे हो रहे इस जलवायु परिवर्तन पर आप सबसे बड़ा असर कैसे डाल सकते हैं? इसके लिए आप अपने दोस्तों और परिवार के लोगो से बात करें, और यह भी स्पष्ट करें कि आपके प्रतिनिधि अच्छे फैसले ले रहे हैं। आप सार्वजनिक भूमि की रक्षा और उस पर प्रदुषण को रोकने में मदद जैसे कार्य भी कर सकते हैं।
2) रिन्यूएबल ऊर्जा के साथ अपने घर को बिजली दें : एक ऐसी कंपनी को चुनें जो हवा या सोलर एनर्जी की सहायता से कम से कम आधी शक्ति उत्पन्न करती हों।
3) वेदराइज़ : बिल्डिंग हीटिंग और कूलिंग, ऊर्जा के सबसे बड़े उपयोगों में से हैं । घर की ऊर्जा के इस्तेमाल का लगभग आधा हिस्सा हीटिंग और एयर कंडीशनिंग मे होता है। आप ड्राफ्ट सील करके और अपने स्थान को अलग थलग रखके, इसे और अधिक ऊर्जा कुशल बना सकते हैं।
4) ऊर्जा-कुशल उपकरणों में निवेश : ऊर्जा कुशल उपकरणों और उत्पादों ने 2.3 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड को हवा में जाने से रोका है। रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन और अन्य उपकरणों कों खरीदते समय एनर्जी स्टार लेबल ज़रूर देखे, यह आपको बताएगा कि कौन से उपकरण सबसे कुशल हैं।
5) पानी की बर्बादी कम करें : पानी की बचत करने से कार्बन प्रदूषण भी कम होता है। पानी की बचत के लिए आप कम समय के लिए शावर लें, ब्रश करते समय नल को बंद कर आदि।
6) कम ईंधन से चलने वाला वाहन चलाएं : गैस-स्मार्ट कार, जैसे कि हाइब्रिड या पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहन, ईंधन, पैसे और पर्यावरण-तीनो को बचाते है। इसलिए जितना हो सके इन्ही वाहनों का इस्तेमाल करें।

यह देखते हुए कि अगली सदी में जलवायु परिवर्तन के असर के बढ़ने का अनुमान है | संभावना है कि तो आने वाले समय में कुछ मौजूदा स्वास्थ्य खतरे बढ़ सकते है और नए स्वास्थ्य खतरे भी उभर सकते हैं। जलवायु कैसे बदल रहा है और इसका हम पर क्या असर होगा, इसपर हमारी समझ को जोड़कर भविष्य के जलवायु परिवर्तन की मात्रा को कम करने के बारे में निर्णय लेने के लिए प्राथमिकताओं का सुझाव दे सकते है | सार्वजनिक स्वास्थ्य और खोज की जरूरतों को पहचानने में मदद कर सकते है। जलवायु परिवर्तन के लिए ज़्यादातर ज़िम्मेदार मनुष्य ही है | हमने अपने पर्यावरण को काफ़ी नुक्सान पहुंचाया है और उसी के नतीजे स्वरूप हमें जलवायु परिवर्तन का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन अभी भी देर नहीं हुई है। यदि हम सभी व्यक्तिगत स्तर पर व्यवहारात्मक सुधार का ख्याल रखे तो जलवायु परिवर्तन को कम करने में प्रभावी भूमिका निभा सकते है।

courtesy: google images

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