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कपालभाति प्राणायाम कैसे करें| KAPALBHATI PRANAYAM KAISE KARE

कपालभाति प्राणायाम कैसे करें| KAPALBHATI PRANAYAM KAISE KARE

कपालभाति प्राणायाम कैसे करें- वर्तमान योग और ध्यान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सामयिक जिज्ञासा बन कर उभरा है | जीवन में जहाँ ज्ञान, सम्मान, धन तथा सम्प्पति पाना जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है हमें अपने आप को सेहतमंद बनाये रखना।  इस भाग दौड़ के जिंदिगी में हमे अपने आप को तरोताजा बनाये रखने के लिए कुछ ऐसे प्राणायाम करने चाहिए जिन्हें करने के लिए कहीं जाने की आवश्यक नहीं होती, आप बहुत ही आसानी से इसे अपने घर पर भी कर सकते है, बस आपको थोड़ी सी सावधानी भी बरतनी होगी। आज हम बात करेंगे कपालभाति प्राणायाम के बारे में। परन्तु अब प्रश्न उठता है कि कपालभाति प्राणायाम कैसे करें ? तो, आइये जानते है कि कपालभाति प्राणायाम कैसे करें ? और कपालभाति प्राणायाम से जुड़ी कुछ जरुरी बातों को भी समझने का प्रयास करेंगे |

कपालभाति प्राणायाम कैसे करें अर्थ

कपालभाति प्राणायाम को जानने से पहले हम इसके नाम के पीछे छिपे अर्थ को जानेंगे।  तो, सबसे पहले “कपालभाति” शब्द पर प्रकाश डालेंगे, इस शब्द में कपाल का अर्थ है ललाट या मस्तिष्क  तथा  “भाती”  शब्द का अर्थ है तेज, अगर हम दूसरे शब्द “प्राणायाम” पर प्रकाश डाले तो, इसका अर्थ हुआ अपने श्वसन प्रक्रिया को अत्यधिक लम्बा करना।  जब हम दोनों शब्दों को जोड़ते है तो इसका अर्थ होता है कि, ” अपने श्वसन के द्वारा अपने मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को और अधिक तेज करना। ” तो, जैसा कि इसके नाम का अर्थ है, इस प्राणायाम के द्वारा हमारे मस्तिष्क कि कार्य करने की क्षमता बढ़ जाती है। 

कपालभाति प्राणायाम कैसे करें समय

कपालभाति प्राणायाम करने का सही समय प्रातःकालीन अर्थात सुबह है । परन्तु, कपालभाति प्राणायाम का सबसे ज्यादा लाभ आप सूर्योदय से पहले करके उठा सकते है।  इस भाग-दौड़ और काम-काज के जिंदिगी में बहुत से लोग सुबह वक़्त नहीं निकाल पाते, तो वो संध्या समय अर्थात शाम को इस प्राणायाम को करते है । आप अपनी सुविधानुसार इस प्राणायाम का उचित समय का चुनाव करे: सुबह या शाम। 

कपालभाति प्राणायाम कैसे करेंविधि

कपालभाति प्राणायाम कैसे करें? इसका जबाब अब हम यहाँ देंगे कपालभाति प्राणायाम विधि के द्वारा। कपालभाति प्राणायाम विधि को हम बहुत ही सरल ढंग से एक सूचीबद्ध तरीके से आपको बतलायेंगे, जो निम्ननुसार है :

  1. अपने आँखों को बंद करके ध्यान मुद्रा में बैठ जाये और पूरे शरीर को बिलकुल ढ़ीला छोड़ दे।
  2. अपने दोनों ही नोस्ट्रिल्स से साँस ले जिससे की आपका पेट फूल जाएगा और आपके पेट की पेशियों को सिकोड़ते हुए साँस को निष्कासित कर दे। 
  3. अगली बार जब आप साँस लेंगे तो पेट की पेशियाँ स्वतः ही फ़ैल जाएंगे।  ध्यान दे कि श्वसन की प्रक्रिया करते समय आप किसी भी तरह से  बलपूर्वक साँस न ले। 
  4. इस प्रक्रिया को पहले तो आस्ते-आस्ते शुरू करे , फिर कुछ दिनों के अंतराल पर इस प्रक्रिया में तेजी लाये।  याद रखे, इस क्रिया को करते समय आपके पेट को फूलना और सिकुड़ना बहुत ही आवश्यक है। 
  5. कपालभाति प्राणायाम के प्रारम्भ के दिनों में कपालभाति प्राणायाम को 25 से 30 बार ही करे, कुछ दिनों बाद धीरे धीरे करके इसे बढ़ाकर 150 से 200 तक कर दे।
  6. आप कपालभाति प्राणायाम को बढ़ाकर 450 से 500 बार तक भी कर सकते है। 

कपालभाति प्राणायाम कैसे करे-बाबा रामदेव

बाबा रामदेव ने कपालभाति प्राणायाम को करने का बिलकुल सरल तरीका बताया है, तो आइये अब जानते है कपालभाति प्राणायाम कैसे करे बाबा रामदेव के तरीकों से:

  1. कपालभाति प्राणायाम को सूर्योदय से पहले या प्रातःकाल एक ऐसे वातावरण में करे जहाँ की हवा बिलकुल शुद्ध हो, कपालभाति प्राणायाम की शुरुवात करने पर इंसान पहले तो 3 से 4 मिनट में ही थक जाता है परन्तु कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास करते रहने से कुछ महीनो बाद आप 5 से 10 मिनट तक लगातार कर सकेंगे।
  2. कपालभाति प्राणायाम का अधिक लाभ अथवा फायदा लेने के लिए आप इस प्राणायाम को एकदम शांत, खुली हवा और स्वच्छ जमीन पर आसन बिछा कर पद्मा आसान में बैठ जाए।   
  3. कपालभाति प्राणायाम शुरू करते समय श्वसन की प्रक्रिया में सर्वप्रथम श्वास को सामान्य गति से अंदर की तरफ ले फिर तेजगति से बाहर की तरफ छोड़े। और श्वसन की इस क्रिया की लय को बनाये रखें। 
  4. कपालभाति प्राणायाम में कोशिश करे की प्रत्येक सेकंड में ही श्वास को तेजी से निष्काषित करे। श्वास को निष्काषित करते समय पेट अंदर के तरफ सिकुड़ जाएगा । परन्तु प्रत्येक सेकंड में साँस को बाहर छोड़ने के लिए बहुत अभ्यास की आवश्यकता पड़ती है।  
  5. साँस को छोड़ने के बाद साँस को न रोका करें, अपने आप साँस को वापस अंदर आने दे। हर सेकंड में आप तेज गति से श्वास को बहार छोड़ते रहे। इस तरफ से हर मिनट में 5 बार और 60 मिनट में पूरे 300 बार वायु को निष्काषित करने का प्रयत्न करें।  याद रखें, थकान होने पर  कपालभाति प्राणायाम को 2 से 3 मिनट के लिए रोक दे और आराम करें ।
  6. कपालभाति प्राणायाम शुरू करते समय अगर 50 से 60 बार श्वास निष्काषित न कर पाए तो आप इस प्रक्रिया को कुछ दिनों तक 30 से 40 बार करें।  कुछ दिनों के अभ्यास से आप स्वयं ही 60 बार श्वास को निष्काषित करने में सफल हो जाएंगे और  कपालभाति प्राणायाम की प्रक्रिया करने में आपको आसानी भी होगी। 
  7. कपालभाति प्राणायाम कुछ दिनों तक सही रूप से करते रहने से आप इसकी अवधी को आसानी से ही 5 मिनट से 15 मिनट कर सकते है। और आप हर पाँच मिनट में इसे तीन चरणों में कर सकेंगे।  

कपालभाति प्राणायाम के फ़ायदे

कपालभाति प्राणायाम को सही ढंग से करने से होते है, अनगिनत फायदें, तो आइये जानते है कपालभाति प्राणायाम के के फ़ायदे, जो निम्मानुसार है:

  1. कपालभाति प्राणायाम हमे लगभग हर बिमारी से निजात दिलाता है, और उन बिमारियों को हमारे शरीर में प्रवेश करने से रोकता है।
  2. २कपालभाति प्राणायाम को अगर आप सही ढंग से करें आपको अपने वजन में फर्क बहुत जल्द नजर आएगा। कपालभाति प्राणायाम मोटापा दूर भगाता है।
  3. कपालभाति प्राणायाम करने से आपके चेहरे पर निखार आ जायेगा साथ ही साथ आपकी त्वचा पहले से ज्यादा चमकदार हो जाएगी।    
  4. कपालभाति प्राणायाम एक रामबाण है अस्थमा के रोगियों के लिए। परन्तु कपालभाति प्राणायाम को अस्थमा के रोगियों को किसी उचित सलाहकार के देख रेख में ही करना चाहिए। 
  5. कपालभाति प्राणायाम से वायु हमारे नसों के द्वारा हमारे सिर तक अच्छे से पहुँच जाती है, जिससे कि सिर दर्द की शिकायत दूर हो जाती है।  कपालभाति प्राणायाम माइग्रेन में भी काफी मददगार साबित होती है । कपालभाति प्राणायाम से बालों का  झड़ना बंद हो जाता है ।
  6. कपालभाति प्राणायाम से श्वसन से सम्बंधित बीमारियाँ तथा श्वसन के परिवहन में होने वाले अवरोध भी खत्म हो जाते है।  कपालभाति प्राणायाम से बलगम जैसे रोग भी ठीक हो जाते है। 
  7. कपालभाति प्राणायाम रक्त में होने वाली अशुद्धियों को दूर करता है। 
  8. कपालभाति प्राणायाम श्वास नली में होने वाले संक्रमण को भी खत्म कर देता है। 
  9. कपालभाति प्राणायाम साइनसाइटिस तथा राइनिटिस जैसी लाइलाज बीमारियों को भी दूर भगाता है। 
  10. कपालभाति प्राणायाम उदरांगो की अच्छे से मालिश कर देता है और उदर के तंत्रिकाओं को सक्रिय भी कर देता है। साथ ही साथ कपालभाति प्राणायाम पाचन क्रिया को सक्रिय कर सुधार देता है ।  
  11. कपालभाति प्राणायाम सिर के अंदर जागरूकता बढ़ा कर देता है, तथा हमारे आँखों को स्वस्थ कर देता है। 
  12. कपालभाति प्राणायाम कुंडलिनी शक्ति को जगाने में काफी मददगार शाबित होता है ।
  13. कपालभाति प्राणायाम कब्ज को बहुत जल्द खत्म कर देता है। 
  14. कपालभाति प्राणायाम समय से पूर्व बालो के पकने और झड़ने जैसी बीमारी के लिए रामबाण उपाय है।
  15. कपालभाति प्राणायाम से अनिद्रां और अल्पनींद जैसे समस्याओं से भी छुटकारा मिल जाता है। 
  16. कपालभाति प्राणायाम सिर चकराना , मिर्गी तथा दौरे – इन सब में मददगार सिद्ध होता है ।  
  17. कपालभाति प्राणायाम कानो से कम सुनाई देना तथा नाक में होने वाले फोड़ों को भी दूर कर देता है ।

कपालभाति प्राणायाम के चमत्कार

कपालभाति प्राणायाम के बहुत सारे चमत्कार है जो आपको बिलकुल आश्चर्यचकित कर देंगे, तो आइये जानते है कपालभाति प्राणायाम के कुछ चमत्कार, जो निम्मानुसार है:

  1. कपालभाति प्राणायाम के चमत्कारों में से सबसे महत्वपूर्ण चमत्कार यह है कि इसे करने से सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि आध्यत्मिक लाभ भी प्राप्त होगी। और कपालभाति प्राणायाम करने वाले इंसान के चारो तरफ एक पॉजिटिव ऊर्जा का कवच तैयार हो जाता है जिससे कि उस इंसान को कोई बिमारी छू भी नहीं सकती। 
  2. कपालभाति प्राणायाम करने से मानसिक बीमारी दूर हो जाती है और इंसान का चित्त प्रसन्न रहता है। कपालभाति प्राणायाम से दमे की बिमारी तथा मानसिक तनाव से भी छुटकारा मिल जाता है। 
  3. कपालभाति प्राणायाम  करने से इंसान की जीवन शक्ति बढ़ती है तथा मन में शांति बनी रहती है। कपालभाति प्राणायाम  से इंसान कि निर्णय लेने कि शक्ति भी बढ़ जाती है। 
  4. कपालभाति प्राणायाम से कफ और खासी कि बिमारी भी दूर हो जाती है । कपालभाति प्राणायाम आपके फेफड़ो को स्वस्थ रखता है और उन्हें मजबूत बनाता है। 
  5. कपालभाति प्राणायाम का सबसे चमत्कारी चीज है कि यह आपकी पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है । यह पेट से सम्बन्धित बिमारियों को दूर भगाता है तथा आंतो को स्वस्थ रखता है ।
  6. कपालभाति प्राणायाम शरीर के अत्यधिक चर्बी को कम करने में सहायक सिद्ध होता है।  कपालभाति प्राणायाम वजन कम करने में काफी मददगार साबित होता है।  कपालभाति प्राणायाम करने से बहुत तरह कि बीमारियों से निजात मिल जाती है जैसे कि पुराणी बलगम, अजीर्ण और कृमि रोग। 
  7. कपालभाति प्राणायाम गठिया रोग में भी बहुत मददगार सिद्ध होता है।  तथा कपालभाति प्राणायाम शरीर के अंदर सर्दियों के दिनों में भी गर्मी बनायें रखता है। 

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